अब तें रति तव नाथ कर
अब तें रति तव नाथ कर
दोहा ८७ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
अब तें रति तव नाथ कर होइहि नामु अनंगु। बिनु बपु ब्यापिहि सबहि पुनि सुनु निज मिलन प्रसंगु॥ ८७ ॥
अर्थ
अब से रति, तेरे स्वामी का नाम अनंग होगा। बिना शरीर के वह सब में व्याप्त होगा। अब अपने पति से मिलने के प्रसंग को सुन।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “रति को वरदान” प्रकरण का दोहा ८७ है। इस प्रकरण में रति के विलाप पर शिव द्वारा कामदेव के पुनर्जन्म का वरदान और दिव्य करुणा का वर्णन है।
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रति को वरदान