बहुत दिवस बीते एहि भाँती

चौपाई ३, दोहा ३३२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

बहुत दिवस बीते एहि भाँती। जनु सनेह रजु बँधे बराती॥ कौसिक सतानंद तब जाई। कहा बिदेह नृपहि समुझाई॥ ३ ॥

अर्थ

इस प्रकार बहुत दिन बीत गये, मानो बराती स्नेह की रस्सी से बाँध गये हैं। तब विश्वामित्रजी और शतानन्दजी ने जाकर राजा जनक को समझाकर कहा—।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३३२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।

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श्रीसीता-राम विवाह