राम प्रतोषीं मातु सब कहि बिनीत

दोहा ३५७ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

राम प्रतोषीं मातु सब कहि बिनीत बर बैन। सुमिरि संभु गुर बिप्र पद किए नीदबस नैन॥ ३५७ ॥

अर्थ

विनयभरे उत्तम वचन कहकर श्रीरामचन्द्रजी ने सब माताओं को संतुष्ट किया। फिर शिवजी, गुरु और ब्राह्मणों के चरणों का स्मरण कर नेत्रों को नींद के वश किया (अर्थात् वे सो रहे)।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का दोहा ३५७ है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।

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बारात का अयोध्या लौटना