यह सुनि मन गुनि सपथ बड़ि
यह सुनि मन गुनि सपथ बड़ि
दोहा २६ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
यह सुनि मन गुनि सपथ बड़ि बिहसि उठी मतिमंद। भूषन सजति बिलोकि मृगु मनहुँ किरातिनि फंद॥ २६ ॥
अर्थ
यह सुनकर और मन में रामजी की बड़ी सौगन्ध को विचारकर मन्दबुद्धि कैकेयी हँसती हुई उठी और गहने पहनने लगी; मानो कोई भीलनी मृग को देखकर फंदा तैयार कर रही हो !।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का दोहा २६ है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।
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दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना