पुनि कह राउ सुहृद जियँ जानी
पुनि कह राउ सुहृद जियँ जानी
चौपाई १, दोहा २७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
पुनि कह राउ सुहृद जियँ जानी। प्रेम पुलकि मृदु मंजुल बानी॥ भामिनि भयउ तोर मनभावा। घर घर नगर अनंद बधावा॥ १ ॥
अर्थ
अपने जी में कैकेयी को सुहृद् जानकर राजा दशरथजी प्रेम से पुलकित होकर कोमल और सुन्दर वाणी से फिर बोले--हे भामिनि! तेरा मनचाहा हो गया। नगर में घर-घर आनन्द के बधावे बज रहे हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।
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दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना