यह सुधि कोल किरातन्ह पाई
यह सुधि कोल किरातन्ह पाई
चौपाई १, दोहा १३५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
यह सुधि कोल किरातन्ह पाई। हरषे जनु नव निधि घर आई॥ कंद मूल फल भरि भरि दोना। चले रंक जनु लूटन सोना॥ १ ॥
अर्थ
यह (श्रीरामजी के आगमन का) समाचार जब कोल-भीलों ने पाया, तो वे ऐसे हर्षित हुए मानो नवों निधियाँ उनके घर ही पर आ गयी हों। वे दोनों में कन्द, मूल, फल भर-भरकर चले। मानो दरिद्र सोना लूटने चले हों।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चित्रकूट में श्रीराम के निवास और कोल-भीलों की प्रेमपूर्ण सेवा का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा