जथाजोग सनमानि प्रभु बिदा किए मुनिबृंद

दोहा १३४ · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

जथाजोग सनमानि प्रभु बिदा किए मुनिबृंद। करहिं जोग जप जाग तप निज आश्रमन्हि सुछंद॥ १३४ ॥

अर्थ

प्रभु श्रीरामचन्द्रजी ने यथायोग्य सम्मान करके मुनिमण्डली को विदा किया। [श्रीरामचन्द्रजी के आ जाने से] वे सब अपने-अपने आश्रमों में अब स्वतन्त्रता के साथ योग, जप, यज्ञ और तप करने लगे।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा” प्रकरण का दोहा १३४ है। इस प्रकरण में चित्रकूट में श्रीराम के निवास और कोल-भीलों की प्रेमपूर्ण सेवा का वर्णन है।

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चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा