तिन्ह महँ जिन्ह देखे दोउ भ्राता

चौपाई २, दोहा १३५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

तिन्ह महँ जिन्ह देखे दोउ भ्राता। अपर तिन्हहि पूँछहिं मगु जाता॥ कहत सुनत रघुबीर निकाई। आइ सबन्हि देखे रघुराई॥ २ ॥

अर्थ

उनमें से जो दोनों भाइयों को [पहले] देख चुके थे, उनसे दूसरे लोग रास्ते में जाते हुए पूछते हैं। इस प्रकार श्रीरामचन्द्रजी की सुन्दरता कहते-सुनते सबने आकर श्रीरघुनाथजी के दर्शन किये।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चित्रकूट में श्रीराम के निवास और कोल-भीलों की प्रेमपूर्ण सेवा का वर्णन है।

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चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा