उहाँ रामु रजनी अवसेषा
उहाँ रामु रजनी अवसेषा
चौपाई २, दोहा २२६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
उहाँ रामु रजनी अवसेषा। जागे सीयँ सपन अस देखा॥ सहित समाज भरत जनु आए। नाथ बियोग ताप तन ताए॥ २ ॥
अर्थ
उधर श्रीरामचन्द्रजी रात शेष रहते ही जागे। रात में सीताजी ने ऐसा स्वप्न देखा [जिसे वे श्रीरामजी को सुनाने लगीं] मानो समाज सहित भरतजी यहाँ आये हैं। प्रभु के वियोग की अग्नि से उनका शरीर संतप्त है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “सीता का स्वप्न, भरत के आगमन की सूचना, लक्ष्मण का क्रोध” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २२६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी के अशुभ स्वप्न, भरतजी के आगमन की सूचना और लक्ष्मणजी के क्रोध का वर्णन है।
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सीता का स्वप्न, भरत के आगमन की सूचना, लक्ष्मण का क्रोध