सकल मलिन मन दीन दुखारी

चौपाई ३, दोहा २२६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सकल मलिन मन दीन दुखारी। देखीं सासु आन अनुहारी॥ सुनि सिय सपन भरे जल लोचन। भए सोचबस सोच बिमोचन॥ ३ ॥

अर्थ

सभी लोग मन में उदास, दीन और दुःखी हैं। सासुओं को दूसरी ही सूरत में देखा। सीताजी का स्वप्न सुनकर श्रीरामचन्द्रजी के नेत्रों में जल भर आया और सबको सोच से छुड़ा देनेवाले प्रभु स्वयं [लीलासे ] सोच के वश हो गये।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “सीता का स्वप्न, भरत के आगमन की सूचना, लक्ष्मण का क्रोध” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २२६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी के अशुभ स्वप्न, भरतजी के आगमन की सूचना और लक्ष्मणजी के क्रोध का वर्णन है।

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सीता का स्वप्न, भरत के आगमन की सूचना, लक्ष्मण का क्रोध