तेहि अवसर फल फूल दल मूल
तेहि अवसर फल फूल दल मूल
दोहा २७८ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
तेहि अवसर फल फूल दल मूल अनेक प्रकार। लइ आए बनचर बिपुल भरि भरि काँवरि भार॥ २७८ ॥
अर्थ
उसी समय अनेकों प्रकार के बहुत-से फल, फूल, पत्ते, मूल आदि बहँगियों और बोझों में भर-भरकर वनवासी (कोल-किरात) लोग ले आये।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन” प्रकरण का दोहा २७८ है। इस प्रकरण में राजा जनक का चित्रकूट आगमन और कोल-किरात सहित सभी का प्रेमपूर्ण मिलन का वर्णन है।
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जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन