रिषि रुख लखि कह तेरहुतिराजू
रिषि रुख लखि कह तेरहुतिराजू
चौपाई ४, दोहा २७८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
रिषि रुख लखि कह तेरहुतिराजू। इहाँ उचित नहिं असन अनाजू॥ कहा भूप भल सबहि सोहाना। पाइ रजायसु चले नहाना॥ ४ ॥
अर्थ
विश्वामित्रजी का रुख देखकर तिरहुतराज जनकजी ने कहा-यहाँ अन्न खाना उचित नहीं है। राजा का सुन्दर कथन सबके मन को अच्छा लगा। सब आज्ञा पाकर नहाने चले।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २७८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा जनक का चित्रकूट आगमन और कोल-किरात सहित सभी का प्रेमपूर्ण मिलन का वर्णन है।
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जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन