कामद भे गिरि राम प्रसादा
कामद भे गिरि राम प्रसादा
चौपाई १, दोहा २७९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
कामद भे गिरि राम प्रसादा। अवलोकत अपहरत बिषादा॥ सर सरिता बन भूमि बिभागा। जनु उमगत आनँद अनुरागा॥ १ ॥
अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी की कृपा से सब पर्वत मनचाही वस्तु देनेवाले हो गये। वे देखने मात्र से ही दुःखों को सर्वथा हर लेते थे। वहाँ के तालाबों, नदियों, वन और पृथ्वी के सभी भागों में मानो आनन्द और प्रेम उमड़ रहा है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २७९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा जनक का चित्रकूट आगमन और कोल-किरात सहित सभी का प्रेमपूर्ण मिलन का वर्णन है।
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जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन