तजब छोभु जनि छाड़िअ छोहू
तजब छोभु जनि छाड़िअ छोहू
चौपाई ३, दोहा ६९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
तजब छोभु जनि छाड़िअ छोहू। करमु कठिन कछु दोसु न मोहू॥ सुनि सिय बचन सासु अकुलानी। दसा कवनि बिधि कहौं बखानी॥ ३ ॥
अर्थ
आप क्षोभ का त्याग कर दें, परंतु कृपा न छोड़ियेगा। कर्म की गति कठिन है, मुझे भी कुछ दोष नहीं है। सीताजी के वचन सुनकर सास व्याकुल हो गयीं। उनकी दशा को मैं किस प्रकार बखानकर कहूँ!
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राम, कौसल्या और सीता का संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ६९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वनगमन से पूर्व श्रीराम, माता कौसल्या और सीता के बीच करुण विदाई संवाद का वर्णन है।
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राम, कौसल्या और सीता का संवाद