तब नृप सीय लाइ उर लीन्ही

चौपाई २, दोहा ७८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

तब नृप सीय लाइ उर लीन्ही। अति हित बहुत भाँति सिख दीन्ही॥ कहि बन के दुख दुसह सुनाए। सासु ससुर पितु सुख समुझाए॥ २ ॥

अर्थ

तब राजा ने सीताजी को हृदय से लगा लिया और बड़े प्रेम से बहुत प्रकार की शिक्षा दी। वन के दुःसह दुःख कहकर सुनाये। फिर सास, ससुर तथा पिता के सुखों को समझाया।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ से विदाई, सीता का अटल निश्चय” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ७८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम, सीता और लक्ष्मण द्वारा दशरथ से वन-गमन की विदाई और सीता के अटल निश्चय का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
दशरथ से विदाई, सीता का अटल निश्चय