सिय मनु राम चरन अनुरागा
सिय मनु राम चरन अनुरागा
चौपाई ३, दोहा ७८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सिय मनु राम चरन अनुरागा। घरु न सुगमु बनु बिषमु न लागा॥ औरउ सबहिं सीय समुझाई। कहि कहि बिपिन बिपति अधिकाई॥ ३ ॥
अर्थ
परन्तु सीताजी का मन श्रीरामचन्द्रजी के चरणों में अनुरक्त था। इसलिये उन्हें घर अच्छा नहीं लगा और न वन भयानक लगा। फिर और सब लोगों ने भी वन में विपत्तियों की अधिकता बता-बताकर सीताजी को समझाया।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ से विदाई, सीता का अटल निश्चय” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ७८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम, सीता और लक्ष्मण द्वारा दशरथ से वन-गमन की विदाई और सीता के अटल निश्चय का वर्णन है।
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दशरथ से विदाई, सीता का अटल निश्चय