तब नरनाहँ बसिष्ठु बोलाए

चौपाई १, दोहा ९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

तब नरनाहँ बसिष्ठु बोलाए। रामधाम सिख देन पठाए॥ गुर आगमनु सुनत रघुनाथा। द्वार आइ पद नायउ माथा॥ १ ॥

अर्थ

तब राजाने वसिष्ठजी को बुलाया और शिक्षा देने के लिये श्रीरामचन्द्रजी के महल में भेजा। गुरु का आगमन सुनते ही श्रीरघुनाथजी ने दरवाजे पर आकर उनके चरणों में मस्तक नवाया।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना