सादर अरघ देइ घर आने

चौपाई २, दोहा ९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सादर अरघ देइ घर आने। सोरह भाँति पूजि सनमाने॥ गहे चरन सिय सहित बहोरी। बोले रामु कमल कर जोरी॥ २ ॥

अर्थ

आदरपूर्वक अर्घ्य देकर उन्हें घर में लाये और षोडशोपचार से पूजा करके उनका सम्मान किया। फिर सीताजी सहित उनके चरण स्पर्श किये और कमल के समान दोनों हाथों को जोड़कर श्रीरामजी बोले--

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।

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राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना