तात चढ़हु रथ बलि महतारी

चौपाई ३, दोहा १८८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

तात चढ़हु रथ बलि महतारी। होइहि प्रिय परिवारु दुखारी॥ तुम्हरें चलत चलिहि सबु लोगू। सकल सोक कृस नहिं मग जोगू॥ ३ ॥

अर्थ

हे बेटा! माता बलैयाँ लेती है, तुम रथ पर चढ़ जाओ, नहीं तो सारा प्यारा परिवार दुखी हो जाएगा। तुम्हारे पैदल चलने से सभी लोग चलेंगे। शोक के मारे सब दुबले हो रहे हैं, पैदल मार्ग के योग्य नहीं हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-शत्रुघ्न सहित अयोध्यावासियों का वनगमन” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १८८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत-शत्रुघ्न, माताओं, गुरुजन और अयोध्यावासियों के प्रेमपूर्ण वनगमन का वर्णन है।

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भरत-शत्रुघ्न सहित अयोध्यावासियों का वनगमन