देखि सनेहु लोग अनुरागे
देखि सनेहु लोग अनुरागे
चौपाई २, दोहा १८८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
देखि सनेहु लोग अनुरागे। उतरि चले हय गय रथ त्यागे॥ जाइ समीप राखि निज डोली। राम मातु मृदु बानी बोली॥ २ ॥
अर्थ
उनका स्नेह देखकर लोग प्रेम में मग्र हो गये और सब घोड़े, हाथी, रथों को छोड़कर उनसे उतरकर पैदल चलने लगे। तब श्रीरामचन्द्रजी की माता कौसल्याजी भरतजी के पास जाकर और अपनी पालकी उनके समीप खड़ी करके कोमल वाणी से बोलीं—।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-शत्रुघ्न सहित अयोध्यावासियों का वनगमन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १८८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत-शत्रुघ्न, माताओं, गुरुजन और अयोध्यावासियों के प्रेमपूर्ण वनगमन का वर्णन है।
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भरत-शत्रुघ्न सहित अयोध्यावासियों का वनगमन