सूत बचन सुनतहिं नरनाहू

चौपाई ३, दोहा १५३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सूत बचन सुनतहिं नरनाहू। परेउ धरनि उर दारुन दाहू॥ तलफत बिषम मोह मन मापा। माजा मनहुँ मीन कहुँ ब्यापा॥ ३ ॥

अर्थ

सारथी सुमन्त्र के वचन सुनते ही राजा पृथ्वी पर गिर पड़े, उनके हृदय में भयानक जलन होने लगी। वे तड़पने लगे, उनका मन भीषण मोह से व्याकुल हो गया। मानो मछली को माजा व्याप गया हो (पहली वर्षा का जल लग गया हो)।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १५३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र-दशरथ संवाद और राम-वियोग में दशरथ का देहावसान का वर्णन है।

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दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान