मैं आपन किमि कहौं कलेसू

चौपाई २, दोहा १५३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

मैं आपन किमि कहौं कलेसू। जिअत फिरेउँ लेइ राम सँदेसू॥ अस कहि सचिव बचन रहि गयऊ। हानि गलानि सोच बस भयऊ॥ २ ॥

अर्थ

मैं अपने क्लेश को कैसे कहूँ, जो श्रीरामजी का यह संदेशा लेकर जीता ही लौट आया! ऐसा कहकर मन्त्री की वाणी रुक गयी (वे चुप हो गये) और वे हानि की ग्लानि और सोच के वश हो गये।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १५३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र-दशरथ संवाद और राम-वियोग में दशरथ का देहावसान का वर्णन है।

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दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान