सुनु सुरेस उपदेसु हमारा

चौपाई १, दोहा २१९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनु सुरेस उपदेसु हमारा। रामहि सेवकु परम पिआरा॥ मानत सुखु सेवक सेवकाईं। सेवक बैर बैरु अधिकाईं॥ १ ॥

अर्थ

हे देवराज! हमारा उपदेश सुनो। श्रीरामजी को अपना सेवक परम प्रिय है। वे अपने सेवक की सेवासे सुख मानते हैं और सेवक के साथ बैर करने से बड़ा भारी वैर मानते हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “इन्द्र-बृहस्पति संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २१९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में इन्द्र की चिंता पर बृहस्पति द्वारा भरत-भक्ति की महिमा और राम-स्वभाव का उपदेश का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
इन्द्र-बृहस्पति संवाद