मनहुँ न आनिअ अमरपति रघुबर भगत
मनहुँ न आनिअ अमरपति रघुबर भगत
दोहा २१८ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
मनहुँ न आनिअ अमरपति रघुबर भगत अकाजु। अजसु लोक परलोक दुख दिन दिन सोक समाजु॥ २१८ ॥
अर्थ
हे देवराज! रघुकुलश्रेष्ठ श्रीरामचन्द्रजी के भक्त का काम बिगाड़ने की बात मन में भी न लाइये। ऐसा करने से लोक में अपयश और परलोक में दुःख होगा और शोक का सामान दिनोंदिन बढ़ता ही चला जायगा।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “इन्द्र-बृहस्पति संवाद” प्रकरण का दोहा २१८ है। इस प्रकरण में इन्द्र की चिंता पर बृहस्पति द्वारा भरत-भक्ति की महिमा और राम-स्वभाव का उपदेश का वर्णन है।
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इन्द्र-बृहस्पति संवाद