सुनु जननी सोइ सुतु बड़भागी
सुनु जननी सोइ सुतु बड़भागी
चौपाई ४, दोहा ४१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनु जननी सोइ सुतु बड़भागी। जो पितु मातु बचन अनुरागी॥ तनय मातु पितु तोषनिहारा। दुर्लभ जननि सकल संसारा॥ ४ ॥
अर्थ
हे माता! सुनो, वही पुत्र बड़भागी है, जो पिता-माता के वचनों का अनुरागी (पालन करनेवाला) है। [आज्ञा-पालन के द्वारा] माता-पिता को सन्तुष्ट करनेवाला पुत्र, हे जननी! सारे संसार में दुर्लभ है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-कैकेयी-संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ४१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा कैकेयी की आज्ञा को सहज भाव से स्वीकार कर वनवास के लिए तत्पर होने का वर्णन है।
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श्रीराम-कैकेयी-संवाद