सुनि सुधि सोच बिकल सब लोगा

चौपाई ३, दोहा २९४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनि सुधि सोच बिकल सब लोगा। मनहुँ मीनगन नव जल जोगा॥ देवँ प्रथम कुलगुर गति देखी। निरखि बिदेह सनेह बिसेषी॥ ३ ॥

अर्थ

यह समाचार सुनकर सब लोग सोच से व्याकुल हो गये; जैसे नये जल के संयोग से मछलियाँ व्याकुल होती हैं। देवताओं ने पहले कुलगुरु वसिष्ठजी की [प्रेमविहल] दशा देखी, फिर विदेहजी के विशेष स्नेह को देखा।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “जनक-वसिष्ठ संवाद, सरस्वती द्वारा इन्द्र को समझाना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २९४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक-वसिष्ठ संवाद, इन्द्र की चिंता और सरस्वती द्वारा उनके संशय-निवारण का वर्णन है।

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जनक-वसिष्ठ संवाद, सरस्वती द्वारा इन्द्र को समझाना