सुनि सनेह बस उठि नरनाहाँ

चौपाई ३, दोहा ७७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनि सनेह बस उठि नरनाहाँ। बैठारे रघुपति गहि बाहाँ॥ सुनहु तात तुम्ह कहुँ मुनि कहहीं। रामु चराचर नायक अहहीं॥ ३ ॥

अर्थ

यह सुनकर स्नेहवश राजा ने उठकर श्रीरघुनाथजी की बाँह पकड़कर उन्हें बैठा लिया और कहा- हे तात! सुनो, तुम्हारे लिये मुनि लोग कहते हैं कि श्रीराम चराचर के स्वामी हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ से विदाई, सीता का अटल निश्चय” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ७७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम, सीता और लक्ष्मण द्वारा दशरथ से वन-गमन की विदाई और सीता के अटल निश्चय का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
दशरथ से विदाई, सीता का अटल निश्चय