सुभ अरु असुभ करम अनुहारी
सुभ अरु असुभ करम अनुहारी
चौपाई ४, दोहा ७७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सुभ अरु असुभ करम अनुहारी। ईसु देइ फलु हृदयँ बिचारी॥ करइ जो करम पाव फल सोई। निगम नीति असि कह सबु कोई॥ ४ ॥
अर्थ
शुभ और अशुभ कर्मों के अनुसार ईश्वर हृदय में विचार कर फल देता है। जो कर्म करता है वही फल पाता है। ऐसी वेद की नीति है, यह सब कोई कहते हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ से विदाई, सीता का अटल निश्चय” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ७७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम, सीता और लक्ष्मण द्वारा दशरथ से वन-गमन की विदाई और सीता के अटल निश्चय का वर्णन है।
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दशरथ से विदाई, सीता का अटल निश्चय