पितु असीस आयसु मोहि दीजै
पितु असीस आयसु मोहि दीजै
चौपाई २, दोहा ७७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
पितु असीस आयसु मोहि दीजै। हरष समय बिसमउ कत कीजै॥ तात किएँ प्रिय प्रेम प्रमादू। जसु जग जाइ होइ अपबादू॥ २ ॥
अर्थ
हे पिताजी! मुझे आशीर्वाद और आज्ञा दीजिये। हर्ष के समय आप शोक क्यों कर रहे हैं? हे तात! प्रिय के प्रेमवश प्रमाद करने से जगत् में यश जाता रहेगा और निन्दा होगी।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ से विदाई, सीता का अटल निश्चय” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ७७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम, सीता और लक्ष्मण द्वारा दशरथ से वन-गमन की विदाई और सीता के अटल निश्चय का वर्णन है।
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दशरथ से विदाई, सीता का अटल निश्चय