सुनि सिख पाइ असीस बड़ि गनक
सुनि सिख पाइ असीस बड़ि गनक
दोहा ३२३ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
सुनि सिख पाइ असीस बड़ि गनक बोलि दिनु साधि। सिंघासन प्रभु पादुका बैठारे निरुपाधि॥ ३२३ ॥
अर्थ
यह सुनकर और शिक्षा तथा बड़ा आशीर्वाद पाकर भरतजी ने ज्योतिषियों को बुलाया और दिन साधकर प्रभु की चरणपादुकाओं को निःविघ्न सिंहासन पर विराजित कराया।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास” प्रकरण का दोहा ३२३ है। इस प्रकरण में भरतजी की अयोध्या वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास और भरत-चरित्र श्रवण की महिमा का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास