राम मातु गुर पद सिरु नाई
राम मातु गुर पद सिरु नाई
चौपाई १, दोहा ३२४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
राम मातु गुर पद सिरु नाई। प्रभु पद पीठ रजायसु पाई॥ नंदिगावँ करि परन कुटीरा। कीन्ह निवासु धरम धुर धीरा॥ १ ॥
अर्थ
राम की माता और गुरु के चरणों में सिर नवाकर तथा प्रभु की चरणपादुकाओं की आज्ञा पाकर, धर्म की धुरी धारण करने में धीर भरतजी ने नन्दिग्राम में पर्णकुटी बनाकर उसी में निवास किया।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३२४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी की अयोध्या वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास और भरत-चरित्र श्रवण की महिमा का वर्णन है।
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भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास