सुनि गुह कहइ नीक कह बूढ़ा
सुनि गुह कहइ नीक कह बूढ़ा
चौपाई ४, दोहा १९२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनि गुह कहइ नीक कह बूढ़ा। सहसा करि पछिताहिं बिमूढ़ा॥ भरत सुभाउ सीलु बिनु बूझें। बड़ि हित हानि जानि बिनु जूझें॥ ४ ॥
अर्थ
यह सुनकर निषादराज गुह ने कहा--बूढ़ा ठीक कह रहा है। जल्दी में (बिना विचारे) कोई काम करके मूर्ख लोग पछताते हैं। भरतजी का शील-स्वभाव बिना समझे और बिना जाने युद्ध करने में हित की बहुत बड़ी हानि है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “निषाद की शंका और सावधानी” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १९२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत की सेना देख निषादराज गुह की शंका और सावधानी का वर्णन है।
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निषाद की शंका और सावधानी