सुनत सुमंगल बैन मन प्रमोद तन

सोरठा २२६ · अयोध्याकाण्ड

सोरठा पाठ

सुनत सुमंगल बैन मन प्रमोद तन पुलक भर। सरद सरोरुह नैन तुलसी भरे सनेह जल॥ २२६ ॥

अर्थ

तुलसीदासजी कहते हैं कि सुन्दर मंगल वचन सुनते ही श्रीरामजी के मन में बड़ा आनन्द हुआ। शरीर में पुलकावली छा गयी, और शरद्-ऋतु के कमल के समान नेत्र प्रेमाश्रुओं से भर गये।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “सीता का स्वप्न, भरत के आगमन की सूचना, लक्ष्मण का क्रोध” प्रकरण का सोरठा २२६ है। इस प्रकरण में सीताजी के अशुभ स्वप्न, भरतजी के आगमन की सूचना और लक्ष्मणजी के क्रोध का वर्णन है।

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सीता का स्वप्न, भरत के आगमन की सूचना, लक्ष्मण का क्रोध