बहुरि सोचबस भे सियरवनू

चौपाई १, दोहा २२७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

बहुरि सोचबस भे सियरवनू। कारन कवन भरत आगवनू॥ एक आइ अस कहा बहोरी। सेन संग चतुरंग न थोरी॥ १ ॥

अर्थ

सीतापति श्रीरामचन्द्रजी पुनः सोच के वश हो गये कि भरत के आने का क्या कारण है? फिर एक ने आकर ऐसा कहा कि उनके साथ में बड़ी भारी चतुरंगिणी सेना भी है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “सीता का स्वप्न, भरत के आगमन की सूचना, लक्ष्मण का क्रोध” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २२७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी के अशुभ स्वप्न, भरतजी के आगमन की सूचना और लक्ष्मणजी के क्रोध का वर्णन है।

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सीता का स्वप्न, भरत के आगमन की सूचना, लक्ष्मण का क्रोध