सनमानि सुर मुनि बंदि बैठे उतर
छन्द, दोहा २२६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
छन्द पाठ
सनमानि सुर मुनि बंदि बैठे उतर दिसि देखत भए। नभ धूरि खग मृग भूरि भागे बिकल प्रभु आश्रम गए॥ तुलसी उठे अवलोकि कारनु काह चित सचकित रहे। सब समाचार किरात कोलन्हि आइ तेहि अवसर कहे॥
अर्थ
देवताओं का सम्मान (पूजन) और मुनियों की वन्दना करके श्रीरामचन्द्रजी बैठ गये और उत्तर दिशा की ओर देखने लगे। आकाश में धूल छा रही है; बहुत-से पक्षी और पशु व्याकुल होकर भागे हुए प्रभु के आश्रमको आ रहे हैं। तुलसीदासजी कहते हैं कि प्रभु श्रीरामचन्द्रजी यह देखकर उठे और सोचने लगे कि क्या कारण है? वे चित्त में आश्चर्ययुक्त हो गये। उसी समय कोल-भीलोंने आकर सब समाचार कहे॥
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “सीता का स्वप्न, भरत के आगमन की सूचना, लक्ष्मण का क्रोध” प्रकरण का छन्द, दोहा २२६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी के अशुभ स्वप्न, भरतजी के आगमन की सूचना और लक्ष्मणजी के क्रोध का वर्णन है।