सुनत राम गुन ग्राम सुहाए

चौपाई २, दोहा २०६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनत राम गुन ग्राम सुहाए। भरद्वाज मुनिबर पहिं आए॥ दंड प्रनामु करत मुनि देखे। मूरतिमंत भाग्य निज लेखे॥ २ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी के सुन्दर गुणसमूहों को सुनते हुए वे मुनिश्रेष्ठ भरद्वाजजी के पास आए। मुनि ने भरतजी को दण्डवत्-प्रणाम करते देखा और उन्हें अपना मूर्तिमान् सौभाग्य समझा।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २०६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी का प्रयाग तीर्थ दर्शन और महर्षि भरद्वाज से भक्तिपूर्ण संवाद का वर्णन है।

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भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद