प्रमुदित तीरथराज निवासी
प्रमुदित तीरथराज निवासी
चौपाई १, दोहा २०६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
प्रमुदित तीरथराज निवासी। बैखानस बटु गृही उदासी॥ कहहिं परसपर मिलि दस पाँचा। भरत सनेहु सीलु सुचि साँचा॥ १ ॥
अर्थ
तीर्थराज प्रयाग में रहनेवाले वैखानस, बटु, गृहस्थ और उदासीन सब बहुत ही आनन्दित हैं और दस-पाँच मिलकर आपस में कहते हैं कि भरतजी का स्नेह, शील, पवित्र और सच्चा है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २०६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी का प्रयाग तीर्थ दर्शन और महर्षि भरद्वाज से भक्तिपूर्ण संवाद का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद