औरु करै अपराधु कोउ और पाव
औरु करै अपराधु कोउ और पाव
दोहा ७७ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
औरु करै अपराधु कोउ और पाव फल भोगु। अति बिचित्र भगवंत गति को जग जानै जोगु॥ ७७ ॥
अर्थ
अपराध तो कोई और करे और उसके फल का भोग कोई और पावे। भगवान् की लीला बड़ी ही विचित्र है, उसे जानने योग्य जगत् में कौन है ?
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ से विदाई, सीता का अटल निश्चय” प्रकरण का दोहा ७७ है। इस प्रकरण में राम, सीता और लक्ष्मण द्वारा दशरथ से वन-गमन की विदाई और सीता के अटल निश्चय का वर्णन है।
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दशरथ से विदाई, सीता का अटल निश्चय