सोक बिकल पुनि पूँछ नरेसू
सोक बिकल पुनि पूँछ नरेसू
चौपाई ३, दोहा १४९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सोक बिकल पुनि पूँछ नरेसू। कहु सिय राम लखन संदेसू॥ राम रूप गुन सील सुभाऊ। सुमिरि सुमिरि उर सोचत राऊ॥ ३ ॥
अर्थ
शोक से व्याकुल होकर राजा फिर पूछने लगे—सीता, राम और लक्ष्मण का सन्देशा तो कहो। श्रीरामचन्द्रजी के रूप, गुण, शील और स्वभाव को याद कर-करके राजा हृदय में सोच करते हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १४९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र-दशरथ संवाद और राम-वियोग में दशरथ का देहावसान का वर्णन है।
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दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान