राम कुसल कहु सखा सनेही
राम कुसल कहु सखा सनेही
चौपाई २, दोहा १४९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
राम कुसल कहु सखा सनेही। कहँ रघुनाथु लखनु बैदेही॥ आने फेरि कि बनहि सिधाए। सुनत सचिव लोचन जल छाए॥ २ ॥
अर्थ
हे मेरे प्रेमी सखा! श्रीराम की कुशल कहो। बताओ, श्रीराम, लक्ष्मण और जानकी कहाँ हैं? उन्हें लौटा लाये हो या वे वन को चले गये? यह सुनते ही मन्त्री के नेत्रों में जल भर आया।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १४९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र-दशरथ संवाद और राम-वियोग में दशरथ का देहावसान का वर्णन है।
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दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान