राउ सुनाइ दीन्ह बनबासू

चौपाई ४, दोहा १४९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

राउ सुनाइ दीन्ह बनबासू। सुनि मन भयउ न हरषु हराँसू॥ सो सुत बिछुरत गए न प्राना। को पापी बड़ मोहि समाना॥ ४ ॥

अर्थ

और कहते हैं—मैंने राजसिंहासन की बात सुनाकर वनवास दे दिया। यह सुनकर भी जिस (राम) के मन में हर्ष और विषाद नहीं हुआ, ऐसे पुत्र से बिछुड़ते समय भी मेरे प्राण नहीं गये; तब मेरे समान बड़ा पापी कौन होगा?

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १४९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र-दशरथ संवाद और राम-वियोग में दशरथ का देहावसान का वर्णन है।

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दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान