सोह न राम पेम बिनु ग्यानू
सोह न राम पेम बिनु ग्यानू
चौपाई ३, दोहा २७७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सोह न राम पेम बिनु ग्यानू। करनधार बिनु जिमि जलजानू॥ मुनि बहुबिधि बिदेहु समुझाए। राम घाट सब लोग नहाए॥ ३ ॥
अर्थ
श्रीरामजी के प्रेम के बिना ज्ञान शोभा नहीं देता, जैसे कर्णधार के बिना जहाज। वसिष्ठजी ने विदेहराज (जनकजी) को बहुत प्रकार से समझाया। तदनन्तर सब लोगों ने श्रीरामजी के घाट पर स्नान किया।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २७७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा जनक का चित्रकूट आगमन और कोल-किरात सहित सभी का प्रेमपूर्ण मिलन का वर्णन है।
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जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन