बिषई साधक सिद्ध सयाने

चौपाई २, दोहा २७७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

बिषई साधक सिद्ध सयाने। त्रिबिध जीव जग बेद बखाने॥ राम सनेह सरस मन जासू। साधु सभाँ बड़ आदर तासू॥ २ ॥

अर्थ

विषयी, साधक और ज्ञानवान् सिद्ध पुरुष--जगत् में ये तीन प्रकार के जीव वेद ने बताये हैं। इन तीनों में जिसका चित्त श्रीरामजी के स्नेह से सरस (सराबोर) रहता है, साधुओं की सभा में उसी का बड़ा आदर होता है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २७७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा जनक का चित्रकूट आगमन और कोल-किरात सहित सभी का प्रेमपूर्ण मिलन का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
जनकजी का चित्रकूट आगमन, सबका मिलन