सो तुम्ह करहु करावहु मोहू

चौपाई २, दोहा ३०६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सो तुम्ह करहु करावहु मोहू। तात तरनिकुल पालक होहू॥ साधक एक सकल सिधि देनी। कीरति सुगति भूतिमय बेनी॥ २ ॥

अर्थ

हे तात! तुम वही करो और मुझसे भी कराओ तथा सूर्यकुल के रक्षक बनो। साधक के लिये यह एक ही (आज्ञापालनरूपी साधना) सम्पूर्ण सिद्धियों की देनेवाली, कीर्तिमयी, सुगतिमयी और ऐश्वर्यमयी त्रिवेणी है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरत संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३०६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरत को पितृ आज्ञा, राजधर्म और समर्पण का उपदेश का वर्णन है।

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श्रीराम-भरत संवाद