सो बिचारि सहि संकटु भारी
सो बिचारि सहि संकटु भारी
चौपाई ३, दोहा ३०६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सो बिचारि सहि संकटु भारी। करहु प्रजा परिवारु सुखारी॥ बाँटी बिपति सबहिं मोहि भाई। तुम्हहि अवधि भरि बड़ि कठिनाई॥ ३ ॥
अर्थ
इसे विचारकर भारी संकट सहकर भी प्रजा और परिवार को सुखी करो। हे भाई ! मेरी विपत्ति सभी ने बाँट ली है, परन्तु तुमको तो अवधि भर बड़ी कठिनाई है (सबसे अधिक दुःख है)।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरत संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३०६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरत को पितृ आज्ञा, राजधर्म और समर्पण का उपदेश का वर्णन है।
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श्रीराम-भरत संवाद