सहित समाज तुम्हार हमारा
सहित समाज तुम्हार हमारा
चौपाई १, दोहा ३०६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सहित समाज तुम्हार हमारा। घर बन गुर प्रसाद रखवारा॥ मातु पिता गुर स्वामि निदेसू। सकल धरम धरनीधर सेसू॥ १ ॥
अर्थ
गुरुजी का प्रसाद (अनुग्रह) ही घर में और वन में समाज सहित तुम्हारा और हमारा रक्षक है। माता, पिता, गुरु और स्वामी की आज्ञा [का पालन] समस्त धर्मरूपी पृथ्वी को धारण करने में शेषजी के समान है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरत संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३०६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरत को पितृ आज्ञा, राजधर्म और समर्पण का उपदेश का वर्णन है।
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श्रीराम-भरत संवाद