सीय लखन जन सहित सुहाए

चौपाई २, दोहा १०७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सीय लखन जन सहित सुहाए। अति रुचि राम मूल फल खाए॥ भए बिगतश्रम रामु सुखारे। भरद्वाज मृदु बचन उचारे॥ २ ॥

अर्थ

सीताजी, लक्ष्मणजी और सेवक गुह सहित श्रीरामचन्द्रजी ने उन सुन्दर मूल-फलों को बड़ी रुचि के साथ खाया। थकावट दूर होने से श्रीरामचन्द्रजी सुखी हो गये। तब भरद्वाजजी ने उनसे कोमल वचन कहे--।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “प्रयाग में भरद्वाज से भेंट” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १०७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में प्रयाग में भरद्वाज मुनि से श्रीराम की भेंट और यमुनातट निवासियों के प्रेम का वर्णन है।

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प्रयाग में भरद्वाज से भेंट