सीय आइ मुनिबर पग लागी
सीय आइ मुनिबर पग लागी
चौपाई १, दोहा २४६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सीय आइ मुनिबर पग लागी। उचित असीस लही मन मागी॥ गुरपतिनिहि मुनितियन्ह समेता। मिली पेमु कहि जाइ न जेता॥ १ ॥
अर्थ
सीताजी आकर मुनिवर के चरणों में लगीं और उन्होंने मन-माँगी उचित आशीष पायी। फिर गुरुपत्नी अरुन्धतीजी सहित मुनियों की स्त्रियों से मिलीं। उनका जितना प्रेम था, वह कहा नहीं जाता।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २४६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत का मंदाकिनी स्नान, चित्रकूट आगमन, राम-सीता-लक्ष्मण से करुण मिलन और दशरथ का श्राद्ध का वर्णन है।
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भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध