बंदि बंदि पग सिय सबही के
बंदि बंदि पग सिय सबही के
चौपाई २, दोहा २४६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
बंदि बंदि पग सिय सबही के। आसिरबचन लहे प्रिय जी के॥ सासु सकल जब सीयँ निहारीं। मूदे नयन सहमि सुकुमारीं॥ २ ॥
अर्थ
सीताजी ने सभी के चरणों की वन्दना करके अपने हृदय को प्रिय जी के आशीर्वचन पाये। जब सुकुमारी सीताजी ने सब सासुओं को देखा, तब उन्होंने सहमकर अपनी आँखें बंद कर लीं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २४६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत का मंदाकिनी स्नान, चित्रकूट आगमन, राम-सीता-लक्ष्मण से करुण मिलन और दशरथ का श्राद्ध का वर्णन है।
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भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध