सीतहि सासु असीस सिख दीन्हि अनेक
सीतहि सासु असीस सिख दीन्हि अनेक
दोहा ६९ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
सीतहि सासु असीस सिख दीन्हि अनेक प्रकार। चली नाइ पद पदुम सिरु अति हित बारहिं बार॥ ६९ ॥
अर्थ
सीताजी को सास ने अनेक प्रकार से आशीर्वाद और शिक्षाएँ दीं और वे बड़े ही प्रेम से बार-बार चरणकमलों में सिर नवाकर चलीं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राम, कौसल्या और सीता का संवाद” प्रकरण का दोहा ६९ है। इस प्रकरण में वनगमन से पूर्व श्रीराम, माता कौसल्या और सीता के बीच करुण विदाई संवाद का वर्णन है।
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राम, कौसल्या और सीता का संवाद